Junagarh Gujarat News African entry in Gujarat elections The people of Jambur village have a special connection with PM Modi | गुजरात चुनाव में अफ्रीकन एंट्री, बादशाह मचा रहे धमाल; मोदी की वजह से हो रहे मालामाल

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गुजरात के जम्बूर गांव में अफ्रीकी लोग रहते हैं. इन्हीं के बच्चे जब डांस करते हैं तो कोई कह ही नहीं सकता कि यह भारतीय बच्चे हैं! दिलचस्प बात यह है कि अफ्रीकी होते हुए भी ये लोग अपनी भाषा को छोड़कर गुजराती भाषा बोलना पसंद करते हैं.

गुजरात चुनाव में अफ्रीकन एंट्री, बादशाह मचा रहे धमाल; मोदी की वजह से हो रहे मालामाल

गुजरात के जम्बूर गांव में अफ्रीकी लोग रहते हैं.

Image Credit source: TV9

आप भला सोच रहे होंगे कि गुजरात चुनाव में अफ्रीका की एंट्री की बात क्यों हो रही है! आखिर कहां से अफ्रीका के लोग गुजरात आ गए और इनका चुनावी कनेक्शन क्या है! यह लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कैसै जुड़े हैं ! कई सारी बातें ऐसी है जिसके बारे में सोचकर आप हैरान हो जाएंगे. चलिए हम आपकी मुश्किल आसान कर देते हैं. गुजरात चुनाव कवरेज के दौरान टीवी9 भारतवर्ष की टीम जब सोमनाथ जिले को पार कर जूनागढ़ की ओर जा रही थी तभी बार्डर पर ऊना विधानसभा क्षेत्र में कुछ अफ्रीकन दिखे. पहली नजर में तो यकीन ही नहीं हुआ.

इन्स्टाग्राम पर अकसर अफ्रीकन बच्चों का रील काफी पाॅपुलर दिखता है. इनमें से कुछ बच्चे इसी गांव के हैं. गुजरात के जम्बूर गांव में अफ्रीकी लोग रहते हैं. इन्हीं के बच्चे जब डांस करते हैं तो कोई कह ही नहीं सकता कि यह भारतीय बच्चे हैं! दिलचस्प बात यह है कि अफ्रीकी होते हुए भी ये लोग अपनी भाषा को छोड़कर गुजराती भाषा बोलना पसंद करते हैं.

मोदी ने धमाल को बढा़या आगे

रमजान ने टीवी 9 भारतवर्ष से बातचीत में बताया कि हाल ही में इडिया गेट पर हुए कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने उनकी टीम को बुलाया था. उनकी टीम ने धमाल का परफॉरमेंस दिया. उन्हें काफी सम्मान मिले. रमजान बताते हैं कि नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री से देश के प्रधानमंत्री बन चुके हैं लेकिन आज भी गुजरात के हर समाज को कैसे आगे ले जाया जाए इसकी जुगत में रहते हैं. कहा कि उसी की बदौलत धमाल काफी पाॅपुलर हो रहा है.

धमाल है रोजगार का साधन

गिर फॉरेस्ट एरिया में बने रिजार्ट के मालिक सावन ने टीवी 9 भारतवर्ष से बातचीत में बताया कि रिजार्ट में अथवा शादी व्याह के समय यह धमाल मचाते हैं. यहीं से कुछ रकम इन्हें मिल जाती है. इसमें अतिरिक्त मजदूरी से भी यह कमाते हैं.

बेहतर बुनियादी सुविधाओं की मांग

इनका बस्ति के निवासी साकिब कहते हैं कि हमारे यहाँ पीने के पानी की काफी दिक्कत है. सरकार से गुजारिश है कि जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान किया जाए. इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जल्दी से जल्दी घर मुहैया किए जाएं.

अफ्रीकी मूल के लोग कब आए, इसका कोई प्रमाण नहीं

अफ्रीकी मूल के लोग यहां कब आए इसका कोई प्रमाण नहीं है. कुछ लोग बताते हैं कि गुजरात राज्य में पिछले 200 साल से अफ्रीकी मूल के लोग रह रहे हैं. ये गुजरात की सिद्धी जनजाति के लोग हैं, जो गुजरात के जम्बूर गांव में रहते हैं. वास्तव में इस गांव का नजारा देखकर भारत में मिनी अफ्रीका की झलक दिखाई देती है.

गुलाम बनाकर भारत लाए गए

कुछ लोगों की माने तो अंग्रेज इन्हें गुलाम बनाकर भारत में मजदूरी के लिए लाए . वैसे यह भी माना जाता है कि जूनागढ़ के नवाब द्वारा अफ्रीका के सिद्धियों को गुजरात लाया गया था. उन्होंने गुलाम के तौर पर इन लोगों को यहां के राजा-महाराजाओं के पास सौंप दिया था. बस तभी से ये लोग यहां बस गए. इन लोगों की खासियत है कि ये किसी अन्य धर्म में शादी नहीं करते. इसी कारण ये लोग अफ्रीकी लोगों की ही तरह दिखते हैं.